संयोग से इलाहाबाद से कोरांव जाने की आवश्यकता पड़ी मेरा मतदाता परिचय पत्र ख़ो गया था तो नया बनवाने के लिए अपनी तहसील जाना आवश्यक हो गया था साथ ही मेरे चचेरे भाई साहब अरविन्द द्विवेदी जी का निवास प्रमाण पत्र भी बनवाना था। इलाहाबाद के रामबाग से बस द्वारा जाना था।
बस में जैसे ही अंदर पहुंचे भीड़ तो बहुत थी लेकिन एक सीट पर एक १०-१२ साल का लड़का बैठा था हमने पूंछा क्या वो अकेला है ? वो बोला हाँ, लड़का खिड़की की तरफ बैठा था हमने कहा आप इधर बैठ सकते हो ? लडके के जबाब की शायद मुझे अपेक्षा नहीं थी लेकिन लड़का प्रश्न करते हुए क्यों मुझे खिड़की की तरफ बैठना अच्छा नहीं लगता या मैं बैठ नहीं सकता ? (काहे हमके खिड़की कइती नाही नगद लागत, की हम बैठी नाही सकित ?) लडके का जबाब सुनकर मैं जबाब देना नहीं चाहता था या दे नहीं पाया मैं खुद भ्रमित था। कुछ देर के बाद बस चल दी, मैं अपनी आदतानुसार फेसबुक का अध्ययन करने लगा की थोड़ी ही देर में लडके की आवाज मेरे कानों में आई....... भैया मेरा एक नम्बर लगा देंगे ? घर बात करनी है। हम उसके हाथ की तरफ देखते हुए जिसमे एक टुटा-फूटा मोबाइल था....... क्यों अपने मोबाईल से क्यों नहीं लगा रहे हो ? लड़का बोला बैलेंस नहीं है। हमने कहा तो डलवाना चाहिए था, क्यों तुम बैलेंस नहीं डलवा सकते या अच्छा नहीं लगता ? लड़का बिना जबाब दिए खिड़की से बहार देखने लगा। कुछ देर के बाद हमने कहा किससे बात करनी है लड़का बोला मम्मी से। .....हमने कहा मेरे नम्बर से फोन लगाओगे कल को अगर घर नहीं पहुंचे तो तुम्हारे घर वाले कहेंगे की लास्ट टाइम मेरे ही नम्बर से बात हुयी थी तब तो मेरा कल्याण हो जायेगा। लड़का बोला ऐसा कुछ नहीं होगा भैया बात करवा दीजिये हम आपको पैसे दे देंगे जितने आपके खर्च होंगे। कुछ देर सोचने के बाद हमने कहा नम्बर बोलो लडके ने नम्बर बोला हमने डायल किया और स्पीकर ओन करके उसे दिया लडके के घर के पडोसी का नम्बर था ! लडके ने कहा हम राजकुमार बोलत हैई मम्मी से बात करायी द , मम्मी के पास फ़ोन पहुँचने पर ........लड़का मम्मी हम घरे आवत हैई , उधर से मम्मी बोल रही थी - कहे बाबा ? पापा कालहिं ता ग रहे ...? लड़का बोला नगद नहीं लगत रहा .......तोर याद आवत रही, हम आवत हैई.....। लडके की आवाज रुंध गयी थी फोन काट दिया उसने , फ़ोन मुझे देते हुए......बोला देखा भैया केतना कटा ? हमने फोन लेते हुए कहा चलो कोई बात नहीं।
अब हम दोनों चुप थे वो खिड़की से बहार देख रहा था...... मैं फ़ोन पे फेसबुक स्टेट्स कुछ देर के बाद लडके ने कहा ......भैया आप खिड़की की तरफ बैठ जाइये........ हमने जबाब दिया नहीं नहीं तुम वहां अच्छे लग रहे हो। फिर हमने अपने ही अंदाज में परिचय लेना शुरू किया।
क्या करते हो ? जबाब आया होटल में काम करता हूँ।
कितना पाते हो ? तीन हजार।
पढ़ते क्यों नहीं हो ? कोई जबाब नहीं।
पापा क्या करते है ? मजदूरी।
तो तुम्हे पढ़ते क्यों नहीं, मजदूरी से इतना भी नहीं कमा पाते की तुम्हे पढ़ा सके ?
क्या तुम्हारे यहाँ सरकारी प्राथमिक व् जूनियर विद्यालय नहीं है ?
मेरे इतने सारे प्रश्न सुनकर लड़का कुछ सेकेण्ड चुप रहा फिर बोला साहब बहुत गरीब हैई..... तीन बहिन हैं और मम्मी क तबियत नाही ठीक रहत और सरकारी स्कूल में पढ़ाई - लिखायी कहा होता। एकात् मास्टर आइहीं लड़िकन के बैठाये रहीही और कुछु नाही। पापा कहीं ऐसे नगद कुछ कामबय करा।
एक बार फिर मुझे मौन होना पड़ा। कुछ देर के बाद किराया लेने वाला कंडक्टर आया किराया हमने अपना दिया ! लड़के ने कंडक्टर को २० रूपया दिया..... कंडक्टर बोला २० और ४० रूपया लगता है। लड़का बोला अब नाही बा। कंडक्टर बोला तब कैसे जाओगे ? हम अपने घर से किराया देंगे मालिक को ? लड़का बोला अगली बार दे देंगे भैया। कंडक्टर बोला जहा तक २० रूपया का किराया हो जायेगा वहीँ उतर जाना। हम फिर बोले कंडक्टर भैया ये लीजिये २० इसका किराया जो ये नहीं दे सकता। लड़का बोला भैया रहने दीजिये हम अगली बार इनको दे देंगे या तो फिर वहीँ से पैदल चले जायेंगे। हमने कहा तुम बैठो और खिड़की के बहार देखो और हवा लो .............! हमने सोचा इस बात से वो मुस्करायेगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ !
कुछ देर में मेरा गंतव्य स्थल आ गया था मैं उतरने लगा तो लडके ने बोला खिड़की की तरफ आप ही बैठने लायक थे………! मैं मुस्कराया और चल दिया........ ये कहते हुए अपना ख्याल रखना !
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